गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के संरक्षण कार्यक्रम के तहत जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर जीआईबी को जंगल में छोड़ा गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सैम क्षेत्र में इन दोनों पक्षियों को वन्य क्षेत्र में रिलीज किया। इस दौरान राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब संरक्षण प्रयास केवल बंदी प्रजनन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तैयार किए गए पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। इन दो पक्षियों की जंगल में रिलीज से प्राप्त अनुभव का इस्तेमाल आगे होने वाली रिलीज के लिए प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

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करीब एक दशक की मेहनत के बाद अगला चरण

भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड समेत अन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक समुदाय को लगातार मार्गदर्शन और सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ के करीब एक दशक के लगातार प्रयासों का परिणाम है।

बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त पहल है। कार्यक्रम को इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन और नेशनल CAMPA से फंडिंग सपोर्ट तथा तकनीकी सहयोग भी मिल रहा है।

सैम और रामदेवरा में 97 जीआईबी

संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम के तहत सैम और रामदेवरा की सुविधाओं में फिलहाल 97 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हैं। इनमें 40 पक्षी जंगली अंडों से उत्पन्न हुए हैं, जबकि 57 का पालन कैद में किया गया है।

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इनमें से 86 पक्षियों को बंदी प्रजनन के लिए रखा गया है और 11 को जंगल में छोड़े जाने के लिए निर्धारित किया गया है। इन्हीं 11 में से दो नर पक्षियों को अब डेजर्ट नेशनल पार्क में रिलीज किया गया है।

कार्यक्रम के तहत 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजे पैदा हुए। इससे संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम के तहत पक्षियों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को गति मिली है।

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‘जंपस्टार्ट’ से भी मिली सफलता

जीआईबी के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक स्तर पर ‘जंपस्टार्ट’ दृष्टिकोण का भी इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत जंगली घोंसलों में कैप्टिव-लेड अंडे रखे गए, जिन्हें मादाओं ने स्वीकार किया। इससे राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजों का सफल जन्म हुआ।

वहीं राजस्थान वन विभाग डेजर्ट नेशनल पार्क में प्रजाति के लिए उपयुक्त आवास तैयार करने और उसे बहाल करने पर भी काम कर रहा है। इसके तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ वाले घास के मैदानों के बाड़े स्थापित किए जा रहे हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययनों में इन क्षेत्रों को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के प्रमुख प्रजनन आवासों के रूप में चिन्हित किया गया है। संरक्षण कार्यों को इस उद्देश्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।