जयपुर: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को शासन सचिवालय में जननी एक्सप्रेस सेवा के संचालन और प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं, खासकर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरत के समय अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जननी एक्सप्रेस के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को समय पर परिवहन सुविधा मिल सके। इसके लिए एम्बुलेंस के उपयोग और स्थानीय स्तर पर संचालन व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने को कहा गया।
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एम्बुलेंस के उपयोग की होगी नियमित समीक्षा
अधिकारियों को प्रत्येक एम्बुलेंस के उपयोग का नियमित आकलन करने और मैदानी स्तर से रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए गए हैं। इन रिपोर्ट के आधार पर सेवा में सुधार की जरूरतों की पहचान की जाएगी।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्थानीय स्तर पर संचालन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, जिससे उपलब्ध एम्बुलेंस का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल हो सके।
कॉल सेंटर की पूरी प्रक्रिया की जांच
मुख्य सचिव ने जननी एक्सप्रेस के कॉल सेंटर की पूरे दिन की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने को कहा। इसमें सहायता के लिए आने वाली कॉल से लेकर संबंधित महिला के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तक की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
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उन्होंने कॉल रिकॉर्ड और मासिक रिपोर्ट को प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य निदेशक के स्तर पर होने वाली समीक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान और उन्हें परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
प्रदेश में 600 एम्बुलेंस उपलब्ध
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बैठक में बताया कि प्रदेश में जननी एक्सप्रेस सेवा के तहत 600 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। उनके अनुसार जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक 18 लाख 86 हजार 48 लाभार्थियों ने इस सेवा का लाभ लिया।
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उन्होंने बताया कि वर्तमान में जननी एक्सप्रेस सेवा का संचालन राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है। जुलाई 2026 से सभी 600 एम्बुलेंस पूर्ण रूप से संचालित हैं।
संचालन के विकल्पों पर भी चर्चा
बैठक में जननी एक्सप्रेस सेवा के आगामी संचालन और प्रबंधन की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके लिए खुली निविदा अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के माध्यम से सेवा संचालन के विकल्पों पर विचार किया गया।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, वित्त विभाग के प्रतिनिधि, निदेशक जन स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त मिशन निदेशक, निदेशक वित्त, परियोजना निदेशक, भंडार अधिकारी और राज्य नोडल अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।







