नई दिल्ली: अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन में किस दल को कितनी सीटें मिलती हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सभी सहयोगी मिलकर चुनाव में जीत सुनिश्चित करें।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहयोगी दलों को एकजुटता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों की संख्या या किसी सीट का बंटवारा किस दल के हिस्से में जाता है, उससे ज्यादा अहम गठबंधन की जीत है।
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अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “बात सीट की नहीं जीत की है।” उन्होंने लिखा कि जब मकसद साफ हो तो साथ मिलकर आगे बढ़ना आसान होता है और निगाह मंजिल पर हो तो सफर भी आसान हो जाता है।
सीट बंटवारे से ज्यादा जीत पर जोर
सपा प्रमुख ने अपने संदेश में कहा कि गठबंधन के सभी दलों को मिलकर चुनावी जीत सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक यह जीत सिर्फ गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों की नहीं होगी, बल्कि उन सभी लोगों की होगी जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ और लोकतंत्र, संविधान तथा आरक्षण की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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उन्होंने देश में सौहार्द, तरक्की और खुशहाली का माहौल बनाए रखने की बात भी कही। साथ ही कहा कि लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण पर भाजपा की ओर से कोई आंच नहीं आनी चाहिए।
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सीटों को लेकर सपा-कांग्रेस में चर्चा
चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दोनों दलों के नेताओं की ओर से समय-समय पर सामने आने वाले बयानों के कारण गठबंधन की स्थिति को लेकर अटकलें भी लगती रही हैं।
कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी अजय राय से हटाकर अराधना मिश्रा ‘मोना’ को दी है। राजनीतिक हलकों में इसे सपा के साथ बेहतर समन्वय की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, कांग्रेस ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। उनके गठबंधन को लेकर दिए गए कुछ बयानों के बाद दोनों दलों के बीच असहजता की चर्चा भी सामने आई थी।
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सपा सांसद इकरा हसन के बयानों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही है। ऐसे माहौल में अखिलेश यादव का ताजा बयान सहयोगी दलों के बीच एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सीट बंटवारे का फॉर्मूला अभी तय नहीं
अखिलेश यादव ने अपने बयान में सीट बंटवारे के किसी फॉर्मूले की जानकारी नहीं दी है। फिलहाल उन्होंने सीटों के बजाय चुनावी जीत को प्राथमिकता देने की बात कही है।
उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि आगामी चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी एकजुटता सपा नेतृत्व की प्राथमिकता है। हालांकि, सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतिम बंटवारा किस फॉर्मूले पर होगा, यह अभी तय होना बाकी है।







