Telangana News: बोलारम आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद चोरी करने के मामले में पुलिस ने तीन सेवारत सैन्यकर्मियों समेत सात और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की योजना चोरी किए गए हथियारों का इस्तेमाल कर बैंक, ज्वेलरी दुकानों और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को लूटने की थी। सातों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मलकाजगिरी की पुलिस आयुक्त बी. सुमति ने शनिवार, 3 अक्टूबर को बताया कि नई गिरफ्तारियों के बाद मामले में हिरासत में लिए गए आरोपियों की संख्या आठ हो गई है। इससे पहले मुख्य आरोपी 37 वर्षीय उप्पुथोल्ला मल्लेश उर्फ राजू को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह 20वीं बटालियन, मद्रास रेजिमेंट का सेवानिवृत्त हवलदार है और फिलहाल चंचलगुडा सेंट्रल जेल में बंद है।

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तीन सेवारत सैन्यकर्मी भी आरोपी

गिरफ्तार किए गए सात लोगों में 20वीं बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के सिपाही कोंडुरी शेषुलु, नायक और कोटे (हथियार भंडार) कर्मचारी विनोद कुमार तथा 16वीं बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के हवलदार कुचराकांति प्रवीण शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, शेषुलु और विनोद कुमार आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मार्कापुरम के रहने वाले हैं, जबकि प्रवीण महबूबनगर जिले के गुंडलापोट्टापल्ली का निवासी है।

अन्य गिरफ्तार आरोपियों में पश्चिम बंगाल के बैरकपुर निवासी अवि डे उर्फ ओबी, बैरकपुर कैंटोनमेंट के पास गन्ने के रस की दुकान चलाने वाला बिरबल शाह, मल्लेश का रिश्तेदार और राजमिस्त्री उप्पुथोल्ला मल्लिकार्जुन तथा उसका दोस्त और जनरल स्टोर संचालक चेम्माकर निरंजन शामिल हैं।

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बैंक और ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना

पुलिस आयुक्त के मुताबिक, सेना से अलग होने के बाद आर्थिक परेशानी से जूझ रहे मल्लेश ने कथित तौर पर मल्लिकार्जुन और निरंजन के साथ मिलकर बड़ी संपत्ति संबंधी वारदातों की योजना बनाई थी। जांच में सामने आया कि उसने दोनों को बैंक डकैती से जुड़े वीडियो भेजे और ऐसी वारदातों के तरीके का अध्ययन करने को कहा।

पुलिस का कहना है कि गिरोह का उद्देश्य हथियारों के बल पर बैंकों और ज्वेलरी दुकानों को लूटना तथा अमीर लोगों से रकम वसूलना था।

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पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल के संपर्कों के जरिए पिस्तौल खरीदने की कोशिश सफल नहीं होने पर मल्लेश ने अपनी पूर्व यूनिट से हथियार चोरी करने का फैसला किया। इसके बाद उसने अपने साथ मद्रास रेजिमेंट में काम कर चुके शेषुलु, विनोद कुमार और प्रवीण से संपर्क किया।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि तीनों को योजना की जानकारी थी और उन्होंने कोटे की जानकारी, गार्ड की तैनाती तथा संतरी ड्यूटी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई। पुलिस के मुताबिक, हथियार भंडार और मैगजीन के ताले तोड़ने में भी उनकी भूमिका रही।

पुलिस को नहीं मिला आतंकी कनेक्शन

पुलिस आयुक्त बी. सुमति ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में इस मामले का किसी आतंकी या चरमपंथी संगठन से संबंध नहीं मिला है। पुलिस के मुताबिक, वारदात के पीछे मुख्य उद्देश्य बड़ी संपत्ति संबंधी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना था।

जांच में यह भी सामने आया कि मल्लेश ने चोरी से पहले यूनिट की कई बार रेकी की थी। पुलिस के अनुसार, उसे जानकारी थी कि यूनिट के सीसीटीवी कैमरे मरम्मत के दौर से गुजर रहे थे।

चोरी हुआ हथियार और गोला-बारूद बरामद

बोलारम की 20वीं बटालियन में हथियारों की चोरी का पता 31 अगस्त को चला, जब कर्मियों ने कोटे और मैगजीन के ताले टूटे पाए। यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मयंक गोवितिरकर ने उसी शाम बोलारम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक चोरी 30 अगस्त की रात और 31 अगस्त की शुरुआती घंटों के दौरान हुई।

चोरी किए गए हथियारों में चार AK-203 राइफलें और पांच मैगजीन, एक INSAS राइफल और तीन मैगजीन, छह 9 एमएम पिस्तौल और 12 मैगजीन तथा एक 6.35-बोर की नागरिक पिस्तौल शामिल थी। इसके अलावा तीन दूरबीन और बड़ी मात्रा में कारतूस भी चोरी हुए थे।

पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए गोला-बारूद में 9 एमएम के 1,156 राउंड, AK-203 के 720 राउंड और INSAS के 36 राउंड शामिल हैं। मामले की जांच के दौरान पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। हथियार और गोला-बारूद मल्लेश से जुड़े अलग-अलग ठिकानों से बरामद किए गए, जिनमें नागरकुरनूल के अचमपेट स्थित उसके पिता का घर भी शामिल है।

पश्चिम बंगाल कनेक्शन की भी जांच

पुलिस के मुताबिक मल्लेश का पश्चिम बंगाल के आरोपियों से संपर्क वर्ष 2022 से था, जब 20वीं बटालियन की तैनाती बैरकपुर में थी। इसी दौरान उसने बिरबल शाह के जरिए अवि डे से 10 हजार रुपये में एक देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस खरीदा था। यह हथियार बाद में 23 सितंबर को अचमपेट स्थित उसके पिता के घर से बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, इस हथियार का किसी वारदात में इस्तेमाल नहीं हुआ था।

बोलारम आर्मरी से चोरी के बाद पुलिस के अनुसार अवि डे ने चोरी किए गए हथियार खरीदने की पेशकश की थी। कथित तौर पर उसने प्रत्येक पिस्तौल के लिए तीन लाख रुपये और प्रत्येक लंबी बंदूक के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही थी। गोला-बारूद के लिए अलग भुगतान की बात भी सामने आई है। पुलिस ने बिरबल शाह को इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका में बताया है।

पुलिस के अनुसार अवि डे के खिलाफ बैरकपुर की दूसरी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पहले से आर्म्स एक्ट का एक मामला लंबित है।

मल्लेश नागरकुरनूल जिले के पड़रा मंडल के उदुमेल्ली गांव का रहने वाला है और 30 जून 2026 को सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। पुलिस ने उसे 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और कथित साजिश के बारे में जानकारी सामने आई।

मामले में बोलारम थाने में क्राइम नंबर 207/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।