फतेहपुर: जनपद के मलवां कस्बे में हुए भीषण गैस हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने राहत एवं पुनर्वास की कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को प्रदेश सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री तथा फतेहपुर जिले के प्रभारी मंत्री अजीत पाल पीड़ित परिवारों से मिलने मलवां पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे तथा घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। मंत्री ने कहा कि हादसे की वास्तविक वजह का खुलासा फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मलवां कस्बे में हुए भीषण धमाके और मकान ढहने की घटना में अब तक एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। प्रशासन के अनुसार, घायलों का इलाज मेडिकल कॉलेज में जारी है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है।
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प्रभारी मंत्री अजीत पाल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
इसके बाद प्रभारी मंत्री सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती घायलों का हालचाल जाना। चिकित्सकों से उपचार की प्रगति रिपोर्ट लेते हुए उन्होंने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और इलाज में किसी भी प्रकार की कमी न रहने देने के निर्देश दिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद और संवेदनशील है। प्रारंभिक तौर पर इसे गैस सिलेंडर विस्फोट से जुड़ा हादसा माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारणों की पुष्टि केवल फॉरेंसिक एवं तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी निष्कर्ष पर जल्दबाजी में नहीं पहुंचेगी और मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी।
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हादसे के बाद से ही जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स, पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार घटनास्थल और अस्पताल में राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर घरेलू गैस सुरक्षा, भवन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फिलहाल, अपनों को खो चुके परिवार न्याय और पारदर्शी जांच की उम्मीद लगाए हुए हैं, और सभी की निगाहें अब आने वाली फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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