सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर, फाइलों पर जमा धूल और अधिकारियों का टालमटोल रवैया—जब एक आम नागरिक प्रशासन के पास आस लेकर पहुंचता है, तो अक्सर उसे इन्हीं चुनौतियों से जूझना पड़ता है। लेकिन हिसार के लघु सचिवालय स्थित जिला सभागार में वीरवार को लगा समाधान शिविर कुछ अलग ही माहौल बयां कर रहा था। उपायुक्त महेंद्र पाल मंच पर मुस्तैद थे और सामने कतारबद्ध खड़े थे जिले के तमाम आला अधिकारी।

शिविर की शुरुआत से ही उपायुक्त का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दे दिया कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्रशासन की पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं होगा।

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रावलवास खुर्द की नेहा को मिली राहत: फैमिली आईडी का फंदा सुलझा

समाधान शिविर में सबसे पहली और गंभीर शिकायतों में से एक गांव रावलवास खुर्द की रहने वाली नेहा की थी। नेहा की शिकायत थी कि उनके परिवार पहचान पत्र (PPP) यानी फैमिली आईडी में उनकी पारिवारिक आय वास्तविक स्थिति से कहीं ज्यादा दर्ज कर दी गई है। इसके चलते वे सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी सुविधाओं के लाभ से वंचित हो रही हैं।

मामला सामने आते ही उपायुक्त महेंद्र पाल ने सीधे संबंधित विभाग के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि प्रार्थी की वास्तविक आय का धरातल पर पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करवाया जाए और जल्द से जल्द फैमिली आईडी में दर्ज गलत डेटा को दुरुस्त कर रिपोर्ट सौंपी जाए।

एसडीएम दफ्तर के लापरवाह कर्मियों पर होगी जांच, विभागीय कार्रवाई के आदेश

शिविर में केवल कागजी या बुनियादी ढांचे से जुड़ी शिकायतें ही नहीं आईं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठे। गांव मात्रश्याम के निवासी दिलबाग सिंह ने एक चौंकाने वाला मामला उपायुक्त के सामने रखा। दिलबाग सिंह का आरोप था कि एसडीएम कार्यालय हिसार के कर्मचारियों द्वारा उनकी फसल का ऑनलाइन पंजीकरण (Crop Registration) नहीं किया जा रहा है और उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है।

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किसानों के हक से जुड़े इस मुद्दे पर DC महेंद्र पाल ने कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने तुरंत एसडीएम हिसार (ज्योति मित्तल) को निर्देश दिए कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाए। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि अगर कर्मचारियों की कोई लापरवाही या बदनीयती साबित होती है, तो उनके खिलाफ तुरंत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (Departmental Action) अमल में लाई जाए।