रेवाड़ी के दो गांवों से एक जैसी कहानी निकलकर आई है और इनमे फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि एक की दुकान दवाइयों से भरी है, दूसरे की डेयरी दूध से। दोनों की साझी कड़ी है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जिसने इन्हें अपने व्यवसाय को नए सिरे से खड़ा करने का मौका दिया।

गांव गुरावड़ा की रहने वाली प्रियांशु मेडिकल स्टोर चलाती हैं। व्यवसाय को स्थिर करने के लिए जो पूंजी चाहिए थी वो उन्हें मुद्रा योजना के ज़रिए मिली। इस सहयोग से स्टोर का संचालन मज़बूत हुआ और अब वे इलाके के ग्राहकों को ज़रूरी दवाइयां और स्वास्थ्य उत्पाद बिना रुकावट उपलब्ध करा पा रही हैं। उनके लिए ये सिर्फ़ एक लोन नहीं था बल्कि स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता की तरफ़ एक कदम था और आज वे अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने में जुटी हैं।

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कुछ किलोमीटर दूर गांव कंवाली में नरेंद्र का डेयरी व्यवसाय भी इसी योजना से नई रफ़्तार पकड़ पाया। मुद्रा योजना के तहत मिली वित्तीय मदद से उन्होंने अपने डेयरी के रोज़मर्रा के ख़र्च और ज़रूरतें पूरी कीं। नरेंद्र का कहना है कि सही समय पर मिली ये सहायता उनके लिए एक मौका बनकर आई और डेयरी अब उनकी स्थायी आमदनी का ज़रिया बन चुकी है। 

दोनों कहानियां अलग-अलग व्यवसाय की हैं पर संदेश एक ही है। छोटी पूंजी अगर सही वक़्त पर मिले तो बड़ा बदलाव ला सकती है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को शुरू किया था। इसका मकसद साफ़ है की गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना जमानत के कर्ज़ देना ताकि वे अपना कामकाज शुरू कर सकें या बढ़ा सकें। योजना तीन श्रेणियों में बंटी है - शिशु, किशोर और तरुण जो कारोबार के अलग-अलग चरणों के हिसाब से तय होती हैं। लोन सीधे मुद्रा एजेंसी नहीं देती बल्कि बैंक, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं इसे ज़मीन पर उतारती हैं।

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प्रियांशु और नरेंद्र जैसे लाभार्थी इसी व्यवस्था की मिसाल हैं जहां एक सरकारी योजना सीधे गांव के स्तर तक पहुंचकर रोज़गार को सहारा दे रही है। दोनों के लिए अगला कदम अपने-अपने व्यवसाय का और विस्तार है और प्रियांशु मेडिकल स्टोर को मज़बूत करने में लगी हैं तो नरेंद्र डेयरी गतिविधियों को और व्यवस्थित बनाने में। इलाके के अन्य छोटे उद्यमियों के लिए भी ये दोनों कहानियां एक संकेत हैं कि योजना का लाभ लेना मुश्किल प्रक्रिया नहीं रहा।

(नोट: अभी तक इस विशेष मामले पर कोई अतिरिक्त आधिकारिक आंकड़ा जैसे लोन राशि या स्वीकृति तिथि आदि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।)

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