रेवाड़ी (हरियाणा)। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी क्रियान्वयन और जिला में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सेवा संकल्प अभियान के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन रेवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में यह कार्यशाला सोमवार को लघु सचिवालय सभागार में उपायुक्त (डीसी) श्री अभिषेक मीणा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) श्री राहुल मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने और आभा (ABHA - Ayushman Bharat Health Account) आईडी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया, उप सिविल सर्जन (एबीडीएम) डॉ. जोगेंद्र तंवर तथा हरियाणा के एचएमआईएस मैनेजर (एबीडीएम) श्री उमेश सैनी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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73 प्रतिशत लक्ष्य हासिल, अब तक 10 लाख से अधिक आभा आईडी का लक्ष्य

कार्यशाला के दौरान राज्य एचएमआईएस मैनेजर श्री उमेश सैनी ने बताया कि जिला रेवाड़ी में कुल 10 लाख 8 हजार 729 आभा आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 73 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।

उन्होंने आगे बताया कि आभा (ABHA) 14 अंकों की एक यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसके बन जाने से मरीजों को अस्पतालों में लंबी लाइनों से मुक्ति मिलती है, पेपरलेस इलाज संभव होता है और घर बैठे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की सुविधा प्राप्त होती है। इस आईडी को बनवाने के लिए नागरिक के पास केवल पहचान सत्यापन और मोबाइल नंबर होना आवश्यक है।

प्रतिदिन न्यूनतम 100 आभा आईडी बनाने के निर्देश

एडीसी राहुल मोदी ने कहा कि एबीडीएम के डिजिटल सिस्टम से जुड़कर लाभार्थियों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सुगम व प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHC) के चिकित्सा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन न्यूनतम 100 आभा आईडी बनाना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।

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इसके साथ ही उन्होंने सभी ओपीडी (OPD) काउंटरों पर 'स्कैन एंड शेयर' क्यूआर कोड लगाने तथा एम्स (AIIMS) माजरा के एचएमआईएस को जल्द से जल्द एबीडीएम प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेट करने के निर्देश दिए। एडीसी ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के विभिन्न पहलुओं और इससे नागरिकों को होने वाले दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।

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