सुबह की धुंध में जब गांव उखलचना (कोट) की गलियां जागती हैं, तो अब केवल पगडंडियों पर दौड़ते कदमों की आवाज ही नहीं सुनाई देती। गांव के भीतर बने एक नए भवन से लोहे की प्लेटों की खनक और ट्रेडमिल की लयबद्ध गूंज भी आती है। झज्जर जिले का यह गांव इन दिनों अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। वजह है हरियाणा सरकार द्वारा गांव में स्थापित आधुनिक इंडोर जिम।

कुछ समय पहले तक इस गांव की तस्वीर अलग थी। अगर किसी युवा को बाइसेप्स बनाने हों या किसी को वजन घटाने के लिए प्रॉपर ट्रेनिंग चाहिए हो, तो उसे सीधे झज्जर शहर का रुख करना पड़ता था। पांच-दस किलोमीटर का सफर, निजी जिम की 1000 से 2500 रुपये तक की मासिक फीस, और ऊपर से आने-जाने में खर्च होने वाला समय। नतीजा यह होता था कि कई युवाओं का जोश हफ्ते भर में ठंडा पड़ जाता था। जो शहर नहीं जा सकते थे वे बस इच्छा मारकर रह जाते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।

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नशे से दूर, डंबल से नजदीकी

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ना रही है। खाली दिमाग और सुविधाओं का अभाव अक्सर भटकाव का कारण बनता है। गांव में ही आधुनिक जिम शुरू होने से युवाओं को अपनी दिनचर्या बदलने का एक ठोस बहाना मिल गया है।

झज्जर के जिला परिषद सीईओ मनीष फौगाट बताते हैं, "गांव उखलचना का इंडोर जिम युवाओं के लिए एक बड़े बदलाव का जरिया बना है। जब गांव के भीतर ही पेशेवर उपकरण मिलते हैं तो अनुशासन अपने आप आता है। यह पहल युवाओं को नशे और अस्वस्थ गतिविधियों से दूर रखकर एक सकारात्मक माहौल में ढाल रही है।"

महिलाओं के लिए भी टूटी झिझक की दीवार

आमतौर पर माना जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिम सिर्फ युवाओं की जगह है। मगर उखलचना में यह धारणा टूट रही है। गांव के भीतर सुविधा होने के कारण अब महिलाओं और बुजुर्गों की भी इसमें रुचि बढ़ी है। शहर के निजी जिम में जाने से हिचकने वाली ग्रामीण महिलाएं अब अपनी सहूलियत के हिसाब से समय निकालकर वर्कआउट और फिटनेस एक्टिविटी में हिस्सा ले रही हैं। यह सिर्फ शारीरिक सेहत की बात नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की तरफ भी एक खामोश कदम है।

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