बाजार में रिफाइंड तेल और मिलावट की खबरों के बीच जब लोग सेहतमंद विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, उसी दौर में सिरसा जिले के मंडी डबवाली के एक छोटे उद्यमी ने परंपरा और तकनीक के तालमेल से सफलता का नया रास्ता निकाल लिया है। 'ऑर्गेनिक नेचुरल एग्रो' के संस्थापक कमल कांत ने पारंपरिक लकड़ी के कोल्हू (Wood Cold Press) से तेल निकालने का काम शुरू किया था। आज उनका कारोबार न सिर्फ सिरसा बल्कि दिल्ली, चंडीगढ़ और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक फैल चुका है, और सालाना टर्नओवर करीब ₹40 लाख तक पहुंच गया है।

कैसे मिली व्यवसाय को नई रफ्तार?

शुरुआत में छोटे स्तर पर चल रहे इस काम को बड़े बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं था। कमल कांत ने 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना' (PMFME) के तहत आवेदन किया। योजना के जरिए उन्हें करीब ₹12 लाख की वित्तीय सहायता और बैंक लोन प्राप्त हुआ।

यह भी पढ़ें -रेवाड़ी में मुद्रा योजना से बदली प्रियांशु और नरेंद्र की तस्वीर, छोटे कारोबार को मिला बड़ा सहारा

इस राशि से उन्होंने बुनियादी ढांचे में सुधार किया, नई मशीनरी और पैकेजिंग की व्यवस्था की, और विपणन (मार्केटिंग) नेटवर्क को मजबूत किया। नतीजा यह हुआ कि जहां पहले बिक्री आसपास के क्षेत्रों तक सीमित थी, वहीं अब ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए देश के कोने-कोने में उनके उत्पाद डिलीवर हो रहे हैं।

सिरसा के मंडी डबवाली से शुरू हुआ कोल्ड-प्रेस्ड तेल का सफर
कमलकांत का टर्नओवर 40 लाख पार

लकड़ी के कोल्हू की खासियत क्या है?

कमल कांत बताते हैं कि लकड़ी के कोल्हू से तेल निकालने की प्रक्रिया (कोल्ड-प्रेस्ड) में तापमान बहुत कम रहता है। लोहे के आधुनिक स्पेलर या मिलों की तरह इसमें अत्यधिक गर्मी पैदा नहीं होती। इससे तेल में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व, सुगंध और एंटीऑक्सिडेंट्स पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। उपभोक्ता अब सेहत को लेकर सतर्क हो रहे हैं, इसलिए शुद्ध कोल्ड-प्रेस्ड सरसों, तिल और मूंगफली के तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है।

लोकल से ग्लोबल: 8 परिवारों को दिया रोजगार

कमल कांत का यह सफर केवल उनके अकेले का नहीं है। उनकी इस प्रोसेसिंग यूनिट में आज 8 स्थानीय युवाओं को नियमित रोजगार मिला हुआ है। स्थानीय स्तर पर कृषि पैदावार का प्रसंस्करण करके गांव और कस्बे में ही वैल्यू एडिशन करना इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

यह भी पढ़ें -हरियाणा वोटर लिस्ट रिवीजन का अहम दौर पूरा: 3.78 लाख नए वोटर्स के आवेदन, 44.91 लाख नोटिसों पर चुनाव आयोग सख्त

अगर आप एक आम उपभोक्ता हैं तो इसका सीधा मतलब यह है कि शुद्ध और रसायन-मुक्त खाद्य उत्पाद अब दूर-दराज के महानगरों की बपौती नहीं रहे; आपके नजदीकी कस्बों में यह शुद्धता तैयार हो रही है और ऑनलाइन माध्यम से सीधी डिलीवरी के साथ आपके रसोईघर तक पहुंच सकती है। वहीं, अगर आप एक बेरोजगार युवा या छोटा व्यापारी हैं, तो यह स्टोरी बताती है कि सरकारी वित्तीय मदद से आप स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उपज का प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर सफल उद्यमी बन सकते हैं।

मौजूदा छोटे उद्यमियों के लिए अपार संभावनाएं

जिला सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम केंद्र, सिरसा के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए और मौजूदा छोटे उद्यमियों के लिए अपार संभावनाएं हैं।

यह भी पढ़ें -हिसार समाधान शिविर में गरजे DC महेंद्र पाल: फैमिली आईडी की गड़बड़ी से लेकर लापरवाही पर अधिकारियों की ली क्लास, जानिए मौके पर क्या-क्या सुलझा

  • सब्सिडी का प्रावधान: PMFME योजना के तहत प्रोजेक्ट लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम ₹10 लाख) तक कैपिटल सब्सिडी दी जाती है।

  • पात्रता: व्यक्तिगत उद्यमियों के अलावा स्वयं सहायता समूह (SHG), एफपीओ (FPO) और सहकारी समितियां भी इस योजना का लाभ ले सकती हैं।

  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक युवा जिला MSME केंद्र से संपर्क करके परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा कर सकते हैं।