Rewari: कैथल। हरियाणा में खरीफ सीजन की धान कटाई शुरू होते ही वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और खेतों में आगजनी की घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने जिले में फसल अवशेष और धान की पराली जलाने पर आगामी 30 नवंबर 2026 तक पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लागू कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर यह कड़ा प्रशासनिक आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी किया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने उप कृषि निदेशक के नेतृत्व में खेतों में अवैध रूप से आग लगाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और इन-सीटू व एक्स-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
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629 नोडल अधिकारी तैनात, 1 अफसर पर 100 किसानों की जिम्मेदारी
उप कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र जाखड़ ने तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिले के ग्रामीण अंचलों में फसल अवशेषों को जलने से रोकने के लिए कुल 629 नोडल अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों की सघन तैनाती की गई है। निगरानी प्रणाली को वैज्ञानिक रूप प्रदान करते हुए एक नोडल अधिकारी को उसके अधिकार क्षेत्र में अधिकतम 100 किसानों की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पूरे जिले में इस व्यापक अभियान के सुचारू संचालन और केंद्रीय रिपोर्टिंग के लिए डॉ. सतीश नारा को मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये सभी फील्ड अधिकारी रोजाना अपने टैग किए गए किसानों के खेतों का दौरा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि फसल अवशेषों का निपटारा पर्यावरण अनुकूल मशीनों के माध्यम से ही किया जाए।
सरपंच और नंबरदार भी बने अभियान का हिस्सा
प्रशासन ने जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए गांव स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस विशेष अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। उप कृषि निदेशक के अनुसार, गांव के सरपंचों और नंबरदारों को सीधे तौर पर इस निगरानी तंत्र से जोड़ा गया है।
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ब्लॉक और तहसील स्तर पर सरपंचों के विशेष डिजिटल व सोशल मीडिया ग्रुप्स तैयार किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य गांव में होने वाली किसी भी संभावित आगजनी या पराली जलाने की घटना की रियल-टाइम सूचना सीधे कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारियों तक पहुंचाना है। इससे अधिकारियों की रिस्पॉन्स टाइमिंग में सुधार आएगा और ग्रामीणों को जागरूक करने में भी मदद मिलेगी।
4.5 लाख एकड़ में फसल, ISRO सैटेलाइट और मोबाइल ऐप से ट्रैकिंग
कैथल जिले में इस साल लगभग 4.5 लाख एकड़ के विशाल भूभाग पर धान की फसल की बिजाई की गई है। इतनी बड़ी कृषि भूमि पर सघन निगरानी रखने के लिए तैनात किए गए सभी नोडल अधिकारियों को एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इस व्यवस्था के तहत, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैटेलाइट द्वारा जैसे ही किसी सक्रिय अग्नि स्थान (Active Fire Location - AFL) की लोकेशन ट्रेस होगी, वह तुरंत नोडल अधिकारी के मोबाइल ऐप पर फ्लैश हो जाएगी। इसके बाद नोडल अधिकारी को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करना होगा और ऐप के माध्यम से रिपोर्ट अपलोड करनी होगी कि संबंधित किसान ने फसल अवशेषों का प्रबंधन इन-सीटू, एक्स-सीटू या चारे के रूप में किया है।
नियम तोड़ने पर 'रेड एंट्री', 2 साल तक MSP पर फसल बिक्री और सब्सिडी होगी बंद
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन कर पराली जलाते पकड़े जाने पर दोषी किसानों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित किसान की जमीन की जानकारी सरकार के 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' (MFMB) ई-पोर्टल पर तुरंत 'रेड एंट्री' (Red Entry) के रूप में दर्ज कर दी जाएगी।
रेड एंट्री दर्ज होने के बाद किसान आगामी दो कृषि सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मंडियों में अपनी किसी भी फसल को सरकारी एजेंसियों को नहीं बेच सकेगा। इसके अलावा, कृषि यंत्रों या बीजों पर मिलने वाली सभी प्रकार की सरकारी सब्सिडी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएगी और एनवायरनमेंट कंपनसेशन चार्ज (जुर्माना) भी वसूला जाएगा।
'DRIISHYA' ड्रोन से होगी देर शाम और अलसुबह निगरानी
पिछले साल धान के सीजन के दौरान जिले में पराली जलाने से जुड़े 72 संभावित मामले सैटेलाइट से चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 11 प्रमुख लोकेशंस (कैलरम, चूहड़ माजरा, कांगथली और सीवन के पराली स्टॉक क्षेत्र) पर वास्तविक आगजनी की पुष्टि के बाद 11 दोषी व्यक्तियों पर नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस साल सर्विलांस को और अधिक हाई-टेक बनाते हुए हरियाणा सरकार के 'द्रश्या' (DRIISHYA) संस्थान के सहयोग से विशेष टोही ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। ये ड्रोन देर शाम और अलसुबह के समय रिमोट क्षेत्रों में उड़ान भरकर लाइव वीडियो फुटेज कंट्रोल रूम को भेजेंगे, ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर पराली जलाने वालों पर सीधी नजर रखी जा सके।







