Rewari News: धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही प्रशासन ने पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कमर कस ली है। हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से जिला अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि धान की कटाई के बाद पराली जलाना एक गंभीर कानूनी अपराध है। ऐसा करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा ने जिले की तैयारियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अकेले जाटूसाना ब्लॉक में ही करीब 4,784 एकड़ क्षेत्र में धान की फसल दर्ज की गई है। इसमें से 3,629 एकड़ में बासमती तथा 1,155 एकड़ में धान की अन्य किस्मों की रोपाई की गई है।

132 नोडल अधिकारी करेंगे निगरानी, सैटेलाइट से भी होगी ट्रैकिंग
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने धान की खेती वाले गांवों में 132 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है, जो ग्राउंड स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं पर सीधी नजर रखेंगे। इसके साथ ही 'हरसेक' (HARSAC) द्वारा सैटेलाइट के जरिए भी पूरे जिले की निगरानी की जा रही है ताकि कहीं भी आगजनी की घटना होते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके। राहत की बात यह है कि रेवाड़ी जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान पराली जलाने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है।
मिट्टी की उर्वरता और मित्र कीटों को पहुँचता है नुकसान
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर गांवों का दौरा करें और किसानों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में आग लगाने से जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती है और फसल के लिए लाभदायक मित्र कीट भी मारे जाते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) के लिए इस्तेमाल होने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों तथा उन पर मिलने वाली सरकारी अनुदान (सब्सिडी) योजनाओं की विस्तृत जानकारी दें, ताकि किसान पराली जलाने के बजाय उसके सही निस्तारण के विकल्प चुनें।


