उचाना/जींद: हरियाणा के जींद जिले के कृषि प्रधान क्षेत्र उचाना से अन्नदाताओं (किसानों) के लिए एक बेहद राहत और उत्साह बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। उचाना अनाज मंडी में खरीफ सीजन की मुख्य फसलों कपास (नरमा) और धान की '1509 किस्म' की आवक (आगमन) शुरू हो चुकी है। इस बार मंडी में फसलों के कदम रखते ही निजी व्यापारियों की प्राइवेट बोली में किसानों को पिछले साल की तुलना में काफी धमाकेदार और ऊंचे भाव मिल रहे हैं।

शुरुआती प्राइवेट ऑक्शन (बोली) में ही फसलों के दाम आसमान छूने लगे हैं, जिससे उचाना और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि इस साल मौसम की बेरुखी के कारण पैदावार पर कुछ असर पड़ा है, लेकिन बाजारों में मिल रही इस शानदार कीमत से किसानों को अपने नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई होने की पुख्ता उम्मीद बंधी है।

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कपास का भाव ₹8,860 प्रति क्विंटल के पार, पिछले साल से ₹2,600 का उछाल

उचाना मंडी के आधिकारिक व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में कपास (सफेद सोना) लेकर पहुंच रहे किसानों को अप्रत्याशित रूप से बहुत मोटी कीमत मिल रही है। मंडी में 23 सितंबर को कपास की प्राइवेट बोली ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपने उच्चतम स्तर 8,860 रुपये प्रति क्विंटल के आंकड़े को छू लिया। इसके बाद के दिनों में भी तेजी का रुख लगातार बना रहा। 24 सितंबर को कपास का अधिकतम भाव 8,650 रुपये प्रति क्विंटल और 25 सितंबर को 8,560 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया है।

मार्केटिंग बोर्ड के तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल इसी समान अवधि के दौरान कपास के अधिकतम भाव महज 6,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास सिमट कर रह गए थे। इस लिहाज से देखें तो इस बार किसानों को सीधे तौर पर प्रति क्विंटल 2,400 से 2,600 रुपये तक का भारी मुनाफा मिल रहा है, जो हाल के वर्षों में एक रिकॉर्ड है।

धान 1509 की किस्म भी ₹4,240 पर पहुंची, पिछले साल केवल था ₹3,200 का रेट

कपास के साथ-साथ धान की अगेती किस्म 'धान 1509' की बिकवाली में भी उचाना मंडी में जोरदार तेजी का माहौल बना हुआ है। मंडी में इस लोकप्रिय बासमती वैरायटी की फसल को खरीदने के लिए निजी राइस मिलर्स और बड़े व्यापारियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। 23 सितंबर को धान 1509 के अधिकतम भाव 4,240 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए।

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इसके अगले दिन 24 सितंबर को भाव 4,200 रुपये और 25 सितंबर को 4,115 रुपये प्रति क्विंटल के मजबूत स्तर पर बंद हुए। यदि इसकी तुलना बीते साल के रिकॉर्ड से करें, तो पिछले साल इन दिनों किसानों को धान 1509 के लिए अधिकतम केवल 3,200 रुपये प्रति क्विंटल का ही भाव मिल पा रहा था। इस तरह धान उत्पादक किसानों को भी इस साल प्रति क्विंटल लगभग 1,000 रुपये का सीधा फायदा मिल रहा है।

कम बारिश से उत्पादन घटा, लेकिन ऊंचे भावों से मिलेगी आर्थिक राहत: किसान

मंडी में अपनी फसल बेचने पहुंचे क्षेत्र के प्रगतिशील किसान जगता, पवन, राजबीर और सुभाष ने जमीनी हकीकत साझा करते हुए बताया कि इस साल मानसून और सीजन के दौरान समय पर पर्याप्त बारिश न होने के कारण खेतों में धान 1509 की फसल का प्रति एकड़ उत्पादन (Yield) काफी प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही, पिछले कई वर्षों से कपास की फसल में 'गुलाबी सुंडी' और सफेद मक्खी जैसी विनाशकारी बीमारियों के प्रकोप के कारण इस बार क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने डर के मारे कपास की बिजाई का रकबा (क्षेत्रफल) भी काफी कम कर दिया था।

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किसानों का कहना है कि हालांकि प्रति एकड़ पैदावार कम होने से उन्हें शुरुआत में आर्थिक नुकसान का अंदेशा था, लेकिन अब सीजन की शुरुआत में ही मिल रहे इन बेहतरीन और उछाल वाले भावों ने उनकी चिंता दूर कर दी है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि कीमतों में आई यह तेजी उनके उत्पादन के नुकसान की पूरी भरपाई कर देगी।

मार्केट कमेटी सचिव बोले: आवक और खरीद को लेकर मंडी में पुख्ता इंतजाम

उचाना मार्केट कमेटी के सचिव योगेश ने मंडी की वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक प्रबंधों की जानकारी देते हुए बताया कि इस साल निजी क्षेत्र की प्राइवेट बोलियों में कपास और धान 1509 दोनों ही मुख्य फसलों के भाव पिछले साल के मुकाबले बहुत ज्यादा अच्छे हैं, जो किसानों के लिए बेहद सुखद संकेत है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे-जैसे आने वाले दिनों में फसलों की आवक और तेज होगी, उसे देखते हुए मंडी प्रशासन ने खरीद, किसानों के बैठने, पीने के साफ पानी, बिजली, तौल कांटों की व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध पहले ही मुस्तैद कर दिए हैं ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी न उठानी पड़े। अधिकारियों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग मजबूत होने के कारण आने वाले हफ्तों में धान और कपास के दामों में और अधिक मजबूती देखने को मिल सकती है।