रेवाड़ी: धान की कटाई के बाद पराली जलाने के बजाय उसे कृषि यंत्रों की मदद से मिट्टी में मिलाने वाले किसानों को हरियाणा सरकार 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देगी। इस राशि का लाभ लेने के लिए किसानों का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना जरूरी है। जिले में धान की खेती वाले 132 गांवों में पराली प्रबंधन पर निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
उपायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। यदि कोई किसान पराली जलाता पाया जाता है या उसके खेत में पराली जलने की घटना सामने आती है, तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा किसान के भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी दर्ज की जाएगी।
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इन कृषि यंत्रों से कर सकते हैं पराली प्रबंधन
सहायक कृषि अभियंता दिनेश शर्मा के अनुसार, किसान सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लाउ, जीरो टिल सीड ड्रिल, रोटावेटर और हैरो जैसे कृषि यंत्रों की मदद से धान के अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं।
प्रोत्साहन राशि पाने के लिए खेत में किए गए फसल अवशेष प्रबंधन का सत्यापन जरूरी होगा। संबंधित गांव का नोडल अधिकारी विभागीय मोबाइल एप के माध्यम से खेत का सत्यापन करेगा। इसके बाद मुख्यालय की ओर से पात्र किसान के बैंक खाते में 1,200 रुपये प्रति एकड़ की राशि सीधे भेजी जाएगी।
पराली जलाने से मिट्टी और हवा को नुकसान
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने किसानों से पराली नहीं जलाने और दूसरे किसानों को भी इसके लिए जागरूक करने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी कीट भी नष्ट हो सकते हैं।
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पराली जलने से निकलने वाले सूक्ष्म कणों के कारण हवा में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय कृषि यंत्रों से मिट्टी में मिलाकर उसका प्रबंधन करें।







