कुरुक्षेत्र: 48 कोस कुरुक्षेत्र क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीर्थ स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यालय में निगरानी समिति की बैठक हुई। चेयरमैन रविन्द्र सांगवान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विकास कार्यों की निगरानी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद और पानीपत जिलों से संबंधित लोक निर्माण विभाग, पंचायती राज विभाग तथा हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। हालांकि, जारी सूचना में किसी विशेष तीर्थ स्थल के लिए नई परियोजना, बजट या काम पूरा करने की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया गया है।
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तीर्थों के संरक्षण और सुविधाओं पर जोर
चेयरमैन रविन्द्र सांगवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्राथमिकता 48 कोस कुरुक्षेत्र क्षेत्र के सभी तीर्थों का समग्र विकास करना और इस क्षेत्र की पहचान को व्यापक स्तर पर मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है।
उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और विकास कार्यों की नियमित निगरानी पर जोर दिया। उनके अनुसार, तीर्थ स्थलों का व्यवस्थित विकास होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
पांच जिलों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक में तीर्थ निगरानी समिति के सदस्य सुशील राणा, रामधारी शर्मा और बीबी मित्तल भी मौजूद रहे। इसके अलावा हरियाणा के मुख्य वास्तुकार के प्रतिनिधि तथा लोक निर्माण विभाग, पंचायती राज विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
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48 कोस क्षेत्र में आने वाले पांच जिलों के संबंधित विभागों और हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारियों की भागीदारी के साथ तीर्थ विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
समिति ने तीर्थ स्थलों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए संरक्षण, सौंदर्यीकरण तथा आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया। बैठक की जारी जानकारी में किसी नए निर्णय, स्वीकृत परियोजना या निर्धारित कार्ययोजना का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
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