उन्नत किस्म की मिर्च जैसे 'पुसा ज्वाला' या 'आरमूर' लगाएं। ये फसलें बीमारियों से सुरक्षित और ज्यादा पैदावार देती हैं।
बलुई दोमट मिट्टी मिर्च की खेती के लिए सबसे बेहतर है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
बीजों को पहले नर्सरी में तैयार करें। 30 से 35 दिन की स्वस्थ पौध खेत में रोपाई के लिए बिल्कुल सही होती है।
गोबर की सड़ी खाद के साथ NPK का संतुलित प्रयोग करें। माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स देने से मिर्च की चमक और वजन बढ़ता है।
ड्रिप (टपक) सिंचाई से पानी और खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है, जिससे लागत घटती है और 40% पानी बचता है।
लीफ कर्ल वायरस और थ्रिप्स से बचाव के लिए नियमित नीम के तेल का छिड़काव करें और पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं।
ताजी और हरी मिर्च की समय पर तुड़ाई करें। तुड़ाई के बाद मिर्च की छंटाई (Grading) करके ही बाजार में भेजें।
स्थानीय मंडी के अलावा बड़ी सब्जी मंडियों और प्रोसेसिंग कंपनियों को सीधे सप्लाई करके ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाएं।